Diwali Par Nibandh – दीपावली पर निबंध 500 शब्दों में
प्रस्तावना-
दीपावली का नाम सुनते ही सबके मन में प्रसन्नता हो उठती है। क्योंकि ये एक ऐसा त्यौहार है जिसमे छात्र, व्यापारी व किसान सभी वर्ग के लोगों के लिए ख़ुशी देती है। और इसलिए दीपावली भारत का सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहार है। यह पर्व हिंदुओं के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।
‘दीपावली’ शब्द दो शब्दों से बना है—’दीप’ और ‘आवली’, जिसका अर्थ है ‘दीपों की पंक्ति’। यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है, जो सामान्यतः अक्टूबर या नवंबर महीने में पड़ता है। दीपावली को ‘प्रकाश का पर्व’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन घर-घर में दीये जलाए जाते हैं और पूरा वातावरण रोशनी से जगमगा उठता है।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व-
दीपावली का इतिहास बहुत प्राचीन है और इससे जुड़ी अनेक धार्मिक कथाएँ प्रचलित हैं। रामायण के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास और रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या लौटे थे। अयोध्यावासियों ने अपने प्रिय राजा के आगमन पर घी के दीये जलाकर उनका स्वागत किया था। तभी से दीपावली मनाने की परंपरा शुरू हुई।
पूजन विधि और परंपराएँ-
दीपावली का त्योहार पाँच दिवसीय होता है। इसकी शुरुआत धनतेरस से होती है, जो कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को पड़ती है। इस दिन लोग नए बर्तन और सोना-चाँदी खरीदते हैं। दूसरे दिन नरक चतुर्दशी या छोटी दीपावली मनाई जाती है। तीसरे दिन दीपावली का मुख्य पर्व होता है, जिस दिन शाम को लक्ष्मी-गणेश की पूजा की जाती है। चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पाँचवें दिन भाई दूज का पर्व मनाया जाता है।
दीपावली की शाम को लोग स्नान करके नए वस्त्र धारण करते हैं। घरों को रंगोली से सजाया जाता है और दीयों से प्रकाशित किया जाता है। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। व्यापारी लोग अपने बही-खातों की पूजा करते हैं। बच्चे फुलझड़ियाँ और पटाखे जलाकर खुशियाँ मनाते हैं। मिठाइयाँ बाँटी जाती हैं और सबको दीपावली की शुभकामनाएँ दी जाती हैं।
सामाजिक और आर्थिक महत्व-
दीपावली केवल धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि इसका सामाजिक और आर्थिक महत्व भी है। यह पर्व लोगों को आपस में जोड़ता है। दूर-दूर रहने वाले परिवार के सदस्य इस अवसर पर एक साथ इकट्ठा होते हैं। पुराने झगड़े भुलाकर लोग गले मिलते हैं और मित्रता का हाथ बढ़ाते हैं। यह त्योहार भाई-चारे और एकता का प्रतीक है।
आर्थिक दृष्टि से भी दीपावली का बड़ा महत्व है। इस अवसर पर बाजारों में जबरदस्त रौनक होती है। व्यापारी नए माल की खरीदारी करते हैं और ग्राहक खूब खरीदारी करते हैं। कारीगरों और शिल्पकारों को काम मिलता है। छोटे-बड़े सभी व्यापारियों के लिए यह त्योहार लाभदायक होता है। इस प्रकार दीपावली देश की अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करती है।
पर्यावरण और सावधानियाँ-
वर्तमान समय में दीपावली मनाने के तरीके में कुछ चिंताजनक पहलू भी सामने आए हैं। अत्यधिक पटाखे जलाने से वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण बढ़ता है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और रोगियों को विशेष कष्ट होता है। इसलिए हमें पर्यावरण-हितैषी दीपावली मनानी चाहिए। कम पटाखे जलाएँ, मिट्टी के दीये प्रयोग करें और प्लास्टिक की वस्तुओं से बचें।
साथ ही सावधानी भी आवश्यक है। दीयों को सुरक्षित स्थान पर रखें, बच्चों को अकेले पटाखे न जलाने दें और आग से बचाव के उपाय करें। मिठाइयाँ शुद्ध और ताज़ी खाएँ। इस प्रकार सतर्कता बरतकर हम इस पर्व को सुरक्षित और आनंदमय बना सकते हैं।
उपसंहार-
दिवाली केवल दीये जलाने और पटाखे फोड़ने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन को नई रोशनी देने का अवसर है। यह हमें याद दिलाती है कि चाहे कितना भी अंधेरा क्यों न हो, एक छोटा सा दीया भी उसे दूर कर सकता है। असल में दीपावली तभी सार्थक होगी जब इसका प्रकाश हमारे हृदय में भी प्रवेश करे और हमारे जीवन से अज्ञान का अंधकार दूर हो। यही इस पावन पर्व का सच्चा संदेश है।
Applicationinhindi.com की तरफ से आप सभी पाठकों को इस वर्ष की दीपावली की अग्रिम रूप से हार्दिक शुभकामनाएं। उम्मीद है की ये दीपावली आपके घर आँगन में खूब खुशियाँ बरसायेगी।