Paryavaran Pradushan Par Nibandh | पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध
हेल्लो सभी प्यारे बच्चों को, जैसा की अब दीपावली आने में कुछ ही वक्त रह गया है. लेकिन दीपावली की ख़ुशी अभी से बच्चों के मन में होने लग गयी है. और हो भी क्यूँ न? क्योंकि दीपावली ही एक इकलौता ऐसा त्यौहार लेकर आता है जिसमे बच्चों को लम्बे समय के लिए छुट्टियाँ मिलती है. और साथ में मनोरंजन करने के लिए पटाखे जलना इत्यादि भी इसी त्यौहार में शामिल होते है.
ये सभी दीपावली की गतिविधियां इतनी मनोरंजनात्मक होती है जिसकी वजह से हर बच्चे में मन में इस त्यौहार को लेकर ख़ुशी की लहर सी दौड़ उठती है. और इसी को लेकर टीचर्स भी अपने विद्यार्थियों से होमवर्क के रूप में पर्यावरण प्रदूषण पर निबंध (Paryavaran Pradushan Par Nibandh) लिखकर लाने को देते है. जो की बच्चों के लिए एक सिख होती है.
क्योंकि जैसा की हम जानते है आजकल दुनियाभर में प्रदुषण इस लेवल का फ़ैल गया है की बड़े-बड़े बर्फ पिघलने को तैयार हो चुके है. इसका जीता जागता अभी हाल ही का उदहारण देखें तो जो नेपाल में बाढ़ का संकट आया है, उसे कोई भी आम इन्सान सदियों तक भुला नही पाएगा. इसलिए हमें जरूरत है की समय रहते चेत जाए और अपने पर्यावरण को बचाने का भरसक प्रयास करें.
क्योंकि अगर हम इसी तरह से पटाखों वगेरह से प्रदुषण फैलाते रहेंगे तो एक दिन ऐसा आएगा की जब दुनिया में पूरी तरह से पिघलते बर्फ की वजह से पेरों तलें जमीं भी नही मिलेगी. होगा तो सिर्फ पानी ही पानी जिसका कारण सिर्फ और सिर्फ इन्सान होगा.
प्रस्तावना-
पर्यावरण प्रदूषण आज विश्व के समक्ष सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है. मानव की अनियंत्रित गतिविधियों और औद्योगिक विकास के कारण हमारा पर्यावरण दिन-प्रतिदिन प्रदूषित होता जा रहा है, वायु, जल, मिट्टी और ध्वनि प्रदूषण ने पृथ्वी पर जीवन को संकट में डाल दिया है. यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पर्यावरण की कल्पना भी दुष्कर हो जाएगी.
पर्यावरण प्रदूषण के बारें में-
पर्यावरण के प्राकृतिक संतुलन में हानिकारक पदार्थों के मिलने से उत्पन्न असंतुलन. जब वायु, जल, भूमि या ध्वनि में ऐसे तत्व मिल जाते हैं जो मानव, पशु-पक्षियों तथा पेड़-पौधों के लिए हानिकारक होते हैं, तो उसे प्रदूषण कहते हैं. और ये कई प्रकार के होते है जिनमे- वायु, जल, भूमि और ध्वनि प्रदुषण शामिल है.
प्रदूषण के प्रभाव-
प्रदूषण के कारण ग्लोबल वार्मिंग, ओजोन परत का क्षरण, अम्लीय वर्षा, भूमि कटाव और जैव विविधता का ह्रास हो रहा है. इसके अलावा मानव स्वास्थ्य पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है जिसकी वजह से कई घातक बीमारियाँ फैलती जा रही है.
समाधान-
- हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाना और वनों की रक्षा करनी चाहिए.
- प्लास्टिक की जगह कपड़े या जूट के थैलों का उपयोग करना चाहिए.
- निजी वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन, साइकिल या पैदल चलने को प्राथमिकता देनी चाहिए.
- नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों में कचरा नहीं डालना चाहिए.
- कचरे को गीले और सूखे कचरे में अलग करके उचित स्थान पर डालना चाहिए.
- जनजागरूकता अभियान चलाना चाहिए.
उपसंहार-
पर्यावरण प्रदूषण एक ऐसी समस्या है जिसका समाधान केवल सरकार या संस्थाओं के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता. इसके लिए प्रत्येक नागरिक को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी. अगर हम समय रहते प्रदूषण को रोकने के लिए कदम नहीं उठाएँगे, तो इसका दुष्प्रभाव भविष्य में और अधिक गंभीर हो सकता है. इसलिए हमें प्रकृति का सम्मान करना चाहिए और पर्यावरण को स्वच्छ रखने का संकल्प लेना चाहिए.
अपील- Applicationinhindi.com की आप सभी पाठकों से ये अपील है की, इस दीपावली आप जितना कम हो सकें पटाखों का इस्तेमाल करें. तथा जहाँ तक हो सकें ग्रीन पटाखें ही छोड़ें. और अपने पर्यावरण को बचाने में अपना कर्तव्य निभाएं…!