Dussehra Par Nibandh – दशहरा पर निबंध 500 words में
नमस्कार सभी प्यारे बच्चों को! स्कूल में पढने वाले बच्चों के लिए दशहरा और दिवाली जैसे शब्द किसी ख़ुशी से कम नही होते है। क्योंकि ये शब्द ऐसे है जो बच्चों को उत्साहित कर देते है। जैसा की हम सब जानते है दीपावली के त्यौहार पर स्कूल व कॉलेज में पढने वाले बच्चों की 10 तीन तक की छुट्टियाँ कर दी जाती है। लेकिन इसमें भी एक ट्विस्ट ये है की केवल छुट्टियाँ मनोरंजन के लिए ही नही होती है। इसके साथ-साथ अध्यापक अपने-अपने विषय में गृह कार्य हेतु बहुत काम दे देते है।
जिनको बच्चे अपनी छुट्टियों के दौरान बड़े प्यार से आसानी से कर लेते है। और इन्ही में से एक है दशहरे पर निबंध (dussehra par nibandh) । क्योंकि ज्यादातर बच्चों की इन छुट्टियों के दौरान दीपावली से सम्बन्धित ही कार्य दिया जाता है। इसलिए दोस्तों इस लेख के माध्यम से हम आपको दशहरा पर निबंध 500 words में बता रहे है। जिसे समझकर आप भी अपने लिए आसानी से इस निबन्ध को लिख सकते है।
प्रस्तावना-
दशहरा, जिसे विजयादशमी के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहारों में से एक है। यह त्योहार बुराई पर अच्छाई और असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक है। यह हिंदू कैलेंडर के अनुसार आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। दशहरे का त्योहार भारतीय संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता का अद्भुत संगम है।
महत्व-
ऐसा माना जाता है की, इस दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था। दरअसल हुआ यूँ की इससे पहले रावण ने माता सीता का हरण किया था। भगवान राम ने अपनी पत्नी सीता को रावण से मुक्त कराने के लिए लंका पर आक्रमण किया और युद्ध में रावण को पराजित किया। इसी विजय की याद में दशहरा मनाया जाता है। यह त्योहार हमें सच्चाई, धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
दशहरा सामाजिक समरसता और एकता का प्रतीक भी है। यह त्योहार हमें सिखाता है कि चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों, सत्य और धर्म का मार्ग हमेशा विजयी होता है। यह हमें आत्म-चिंतन करने और अपने भीतर की बुराइयों को दूर करने की प्रेरणा देता है।
उत्सव मनाने का तरीका-
हमारे देश में अनेक स्थानों पर रामलीला का आयोजन किया जाता है, जिसमें भगवान राम के जीवन और रावण के साथ हुए युद्ध का मंचन किया जाता है। दशहरे के दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के बड़े-बड़े पुतले बनाए जाते हैं और शाम को उनका दहन किया जाता है। लोग इस कार्यक्रम को देखने के लिए बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं।
सावधानियां-
जब शाम को इनके पुतले जलाये जाते है इस दौरान इनके पुतले के ऊपर एक मटकी रखी जाती है और इन्ही से इनका चेहरा रंग कर रावन जैसा रूप दिखाया जाता है। लेकिन कई लोग इस पुतले की मटकी के टूटे हुए हिस्से को काफी पवित्र समझते है और जब पुतला जल जाता है तो इसको घर ले जाने के बारें में सोचते है। फिर जब इसमें कोई बिना जला हुआ पटाखा फूटता है तो इससे भारी नुकसान हो सकता है। इसलिए ऐसी सावधानियों को ध्यान में रखने की हमे बहुत ही जरूरत है।
उपसंहार-
दशहरा हमें सिखाता है कि चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, अंत में सत्य और अच्छाई की जीत होती है। हमें अपने अंदर के क्रोध, अहंकार, लालच और बुरे विचारों को दूर करके अच्छे कर्म करने चाहिए। यह त्योहार न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि समाज में प्रेम, भाईचारे और न्याय की भावना को भी बढ़ावा देता है। इसलिए हमें अपने जीवन से अहंकार, ईर्ष्या और बुराई को दूर रखना चाहिए और सत्य, प्रेम और करुणा के मार्ग पर चलना चाहिए।
Applicationinhindi.com की तरफ से आप सभी पाठकों को इस वर्ष के दशहरा त्यौहार तथा दीपावली की अग्रिम रूप से हार्दिक शुभकामनाएं। उम्मीद है की Dussehra 2026 के त्यौहार से हम कोई अच्छी सीख लेंगे. तथा अपने जीवन में सत्य, प्रेम और करुणा के मार्ग पर चलेंगे।